मुख्य सचिव ने ट्यूबवेल पर हो रहे बिजली के खर्च की बचत पर दिया जोर
न्यूज निरपेक्ष, देहरादून। राज्य में ट्यूबवेल पर बिजली खर्च की बचत के दृष्टिगत मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने खाली स्थानों की मैपिंग कर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने की कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश पेयजल विभाग व अन्य सम्बन्धित विभागों को दिए हैं। सीएस ने ट्यूबवेल लगाने से पूर्व भूजल स्तर की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्राप्त करने तथा पेयजल निगम तथा जल संस्थान को पेयजल संकट वाले क्षेत्रों की भूजल स्तर की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव बुधवार को सचिवालय में विश्व बैंक सहायता प्राप्त अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उत्तराखण्ड जलापूर्ति कार्यक्रम से सम्बन्धित12वीं उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।मुख्य सचिव ने योजना के तहत गुड प्रैक्टिसेज की निरन्तरता बनाए रखने को कहा। उन्होंने गुड प्रैक्टिसेज के तहत 100 प्रतिशत जल गुणवत्ता, निरन्तर जलापूर्ति, बिजली की बचत हेतु पम्पिंग में ऊर्जा दक्षता का स्तर बनाए रखना, ग्राहकों की संतुष्टि, मजबूत व त्वरित शिकायत निवारण तंत्र में निरन्तर सुधार के निर्देश दिए हैं। बैठक में मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम तथा उत्तराखण्ड जल संस्थान की विभिन्न योजनाओं के अंतिम परिवर्तन पर अनुमोदन दिया।
बैठक में जानकारी दी गई कि 1042 करोड़ रुपये लागत के विश्व बैंक सहायता प्राप्त अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उत्तराखण्ड जलापूर्ति कार्यक्रम (2018-2025) प्रोजेक्ट की समाप्ति 30 जून, 2025 है। प्रोजेक्ट में 834 करोड़ रुपये का योगदान विश्व बैंक तथा 208 करोड़ रुपये का योगदान उत्तराखण्ड सरकार का है। राज्य के पांच जिलों देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल तथा ऊधमसिंह नगर के 22 शहरों में योजना चल रही है। पेयजल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उक्त प्रोजेक्ट के तहत 22 स्कीम पूरी हो चुकी हैं तथा 108755 नये कनेक्शन दिए गए हैं। यह नये कनेक्शन कार्यक्रम के लक्ष्य से 24 प्रतिशत अधिक हैं।बैठक में सचिव पेयजल, वित्त सहित विभिन्न विभागों के अपर सचिव व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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