नहीं रहे लोकगायक दीवान कनवाल, उत्तराखंड संगीत जगत में शोक

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न्यूज निरपेक्ष, अल्मोड़ा। अपने मधुर सुरों और लोकगीतों से आम जनमानस को थिरकने पर मजबूर करने वाले प्रसिद्ध लोकगायक Diwan Kanwal का बुधवार को निधन हो गया। उन्होंने अल्मोड़ा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड के संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

बताया जा रहा है कि वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। हाल ही में वे उपचार के लिए हल्द्वानी के एक अस्पताल में भर्ती थे। उपचार के बाद वे घर लौट आए थे, लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। दीवान कनवाल ने अपने गीतों के माध्यम से कुमाऊंनी लोकसंगीत को नई पहचान दिलाई। हाल ही में उनका गाया लोकगीत “दुई दीना का ड्यार शेरुवा यौ दूणि में, ना त्यार ना म्यार शेरुवा य दूणि में…” काफी लोकप्रिय हुआ था और लोगों की जुबां पर चढ़ गया था। उनके अन्य लोकप्रिय गीतों में बचपन में रेडियो पर बजने वाला गीत “ओ नंदा सुनंदा तू दैणी है जाए” भी शामिल है। इसके बाद वीसीडी के दौर में “आज कुछि मैत जा” और “के लेखूं अपणा हिया का हाल” जैसे गीत भी काफी प्रसिद्ध हुए।

कुमाऊंनी फिल्म बलि वेदना में गाया उनका गीत “हिमाले सुकीली काया” भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। इसके अलावा ऑल इंडिया के अल्मोड़ा आकाशवाणी केंद्र में उनके कई गीत रिकॉर्ड किए गए हैं, जो समय-समय पर प्रसारित होते रहते हैं। लोकगायक दीवान कनवाल के निधन को उत्तराखंड के लोकसंगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। कलाकारों, सामाजिक संगठनों और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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